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चन्द्रवास ( दिशाशुल ~ यात्रा विचार)

Friday 27 June 2014

दिशाशूल




दिशाशूल ज्ञानार्थ चक्रम


दिशा
दिशाशुल
          फल विचार
पूरब दिशा
सोमवार एवं शनिवार
उत्तर दिशा
मंगल एवं बुधवार
मंगल बुध उत्तरदिसिकाल।।
पश्चिम दिशा
रविवार एवं शुक्रवार
रवि शुक्र जो पश्चिम जाय। हानि होय पथ सुख नहिं पाय।।
दक्षिण दिशा
गुरूवार
गुरौ दक्खिन करे पयाना, फिर नहीं समझो ताको आना।।

अर्थ: सोमवार एवं शनिवार को पूरब दिशा में तथा मंगल एवं बुधवार को उत्तर दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिये। रविवार एवं शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना सर्वदा हानिकारक है। गुरूवार के दिन तो दक्षिण दिशा में यात्रा करना अशुभ है। ये दिशाशुल कहलाते है।

नोट: दिशाशूल में यदि यात्रा करना आवयकता ही हो तो निम्नाकिंत वस्तु खाने से यात्रा शुभ होती है।
वार
 रवि
सोम
मंगल
बुध
 गुरु
 शुक्र
शनि
वस्तु
घी
 दूध
गुड़
पुष्प
दही
घी
तिल

यात्रा में शुभ मुहूर्त
शुभ तिथि-: द्वितीया, तृतीया, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी पूर्णिमा।

शुभ नक्षत्र-: अश्विनी, मृगशिर, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, घनिष्ठा, रेवती।

यात्रा में चन्द्रवास विचार:-

यात्रा में चन्द्रवास विचार
राशि
दिशा
फल  विचार
मेष, सिंह, धनु
राशि के पूर्व में हो तो
धनलाभ
वृष, कन्या, मकर
राशि के दक्षिण में हो तो
सुख सम्पत्ति
मिथुन, तुला, कुम्भ
राशि के पश्चिम में हो तो
मरण तुल्य कष्ट
कर्क, वृश्चिक, मीन
राशि के उत्तर में हो तो
धन हानि

अग्निवास:-
वर्तमान तिथि में 1 जोड़ना पुन: जो वार उस दिन हो उसकी संख्या जोड़ना।
रविवार की संख्या 1 है यही से सभी वारों की संख्या प्रारम्भ होगी।
कुल योग में 4 का भाग देना, शून्य व तीन शेष रहे तो अग्नि का वास पृथ्वी में होता है,
इसमें हवन करने पर कार्य की सिद्धि होती है।

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